सीकर , फरवरी 02 -- राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों की आहट के बीच ग्रामीण अंचलों की राजनीति गरमाने के साथ ही शेखावाटी अंचल के सीकर जिले में सियासी गतिविधियां बढ्ने लगी है।

इस बार के पंचायत चुनाव रोचक होने के साथ घमासान मचाने वाले माने जा रहे हैं और सीकर जिले में कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) भी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है और अपना राजनीतिक वजूद मजबूत करने की जद्दोजहद में जुटी है।

पंचायतों के सीमांकन विस्तार और बदलाव को लेकर भाजपा पहले से ही खुद को "सेफ ज़ोन" में मानते हुए फील गुड की स्थिति में नजर आ रही है वहीं कांग्रेस राज्य सरकार की कथित असफलताओं को मुद्दा बनाकर ग्रामीण सत्ता पर एक बार फिर "हाथ" का कब्जा जमाने को लेकर आशान्वित दिखाई दे रही है।

सीकर जिले के कुछ इलाकों में लाल सलाम यानी वामपंथी ताकतें भी अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए सक्रिय होगी और सांसद अमराराम पर धोद, सीकर, दांतारामगढ़, खंडेला और लक्ष्मणगढ़ में फिर से संगठनात्मक ताकत का एहसास कराने की बड़ी जिम्मेदारी रहेगी।

इसी बीच रालोपा भी इस बार सीकर जिले में पंचायत चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ने के मूड में है. पार्टी सुप्रीमो एवं सांसद हनुमान बेनीवाल समय-समय पर इसके संकेत दे चुके हैं. ऐसे में जिले की ग्रामीण राजनीति का भूगोल बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पंचायत चुनाव में सियासी दलों के साथ कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी. इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, स्वायत शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया और वरिष्ठ नेता महादेव सिंह खंडेला शामिल हैं।

चुनावी माहौल के दौरान सबसे अधिक उठापटक जाट नेताओं के बीच देखने को मिल सकती है और हनुमान सेना और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच सियासी प्रहार और जवाबी हमलों से पंचायत चुनाव और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है। राज्य में पंचायत चुनाव आगामी मार्च एवं अप्रैल में होने की संभावना जताई जा रही है।

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