जालौन , जनवरी 29 -- यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने और उसके प्राकृतिक स्वरूप के पुनर्जीवन के संकल्प के साथ गुरुवार को पंचनद धाम (जगम्मनपुर) से दिल्ली तक 500 किलोमीटर लंबी "जल सहेली यमुना यात्रा" का भव्य शुभारंभ किया गया।

जल सहेली फाउंडेशन और परमार्थ समाजसेवी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा को जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और समाजसेवियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

लगभग 30 दिनों तक चलने वाली यह पदयात्रा प्रतिदिन 15 से 17 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और 28 फरवरी को दिल्ली के वासुदेव घाट पहुंचेगी। यात्रा इटावा, बटेश्वर, आगरा और मथुरा जैसे प्रमुख तीर्थ व ऐतिहासिक नगरों से होकर गुजरेगी। इसका मुख्य उद्देश्य यमुना संरक्षण, स्वच्छता और पुनर्जीवन के लिए जनभागीदारी को सशक्त बनाना है।

शुभारंभ समारोह में मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, महामंडलेश्वर साध्वी सरिता गिरी, "जल पुरुष" डॉ. राजेंद्र सिंह, जालौन के विधायक मूलचंद सिंह निरंजन, भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की आधारशिला हैं।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे ने इसे जनआंदोलन बताते हुए कहा कि यमुना तेजी से अपना प्राकृतिक स्वरूप खो रही है, ऐसे में यह यात्रा समाज को नदी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। परमार्थ संस्थान के निदेशक संजय सिंह ने बताया कि यात्रा के दौरान यमुना तटों का आकलन, वृक्षारोपण और नदी चौपालों के जरिए संवाद किया जाएगा। डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि अभियान के तहत यमुना संरक्षण समिति और यमुना प्रहरी कैडर का गठन भी किया जाएगा। यात्रा से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य यमुना आरती का आयोजन किया गया।

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