जौनपुर , जनवरी 03 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायाधीश वाणी रंजन अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि त्वरित न्याय प्रक्रिया में अधिवक्ता की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और आजादी के बाद संविधान निर्माण में डॉ राजेन्द्र प्रसाद, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डॉ भीमराव अंबेडकर जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं और ये सभी महान पुरुष अधिवक्ता भी थे।
वरिष्ठ अधिवक्ता स्व संतोष कुमार श्रीवास्तव संतोषी बाबू की 20 वी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं सेमिनार त्वरित न्याय प्रक्रिया में न्याय पालिका कार्य पालिका विधायिका एवं अधिवक्ता की भूमिका पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति श्रीमती वाणी रंजन अग्रवाल ने कहा कि त्वरित न्याय प्रक्रिया में न्याय पालिका का जो सम्मान आम आदमी में है, उसे और बढ़ाने की जरूरत है। अधिवक्ता, वादकारी व न्यायाधीश के बीच सेतु बनकर कार्य करता हैं और विधि और न्याय को समय के साथ परिवर्तित होते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतोषी बाबू एक अच्छे और विद्वान अधिवक्ता थे, जो सदैव न्याय हित में कार्य करते थे।
जिला न्यायाधीश सुशील कुमार शशि ने कहा कि न्याय सिर्फ जज से नहीं होता है दोनों पक्षों को सुनने के बाद जो फैसला होता हैं वहीं न्याय होता है। अधिवक्ता जिस वादकारी के लिए कार्य कर रहा है, उसके प्रति ईमानदार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता ही जनमानस का मस्तिष्क है और अधिवक्ता कर्मयोगी होता है। स्वागत भाषण सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव ने करते हुए कहा है अधिवक्ता सदैव न्याय हित में कार्य करता है ।इसके पूर्व सेमिनार का उद्घाटन अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। संचालन मंत्री रण बहादुर यादव ने किया।आभार कार्यकम संयोजक राजेश श्रीवास्तव बच्चा भईया एडवोकेट ने किया। उसके बाद न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल ने चौकियां धाम में मत्था टेका और दर्शन पूजन कर प्रयागराज के लिये प्रस्थान किया।
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