रायपुर , जनवरी 24 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में रायपुर सत्र न्यायालय ने आज केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नियमित रुप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए।
अदालत ने सीबीआई की विशेष निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। इसके साथ ही न्यायालय ने भूपेश बघेल को नियमित रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि मार्च 2025 में सीबीआई की विशेष अदालत ने भूपेश बघेल के खिलाफ दर्ज सभी धाराओं को हटाते हुए कहा था कि उनके विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इस आदेश को चुनौती देते हुए सीबीआई ने रायपुर सत्र न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने दलील दी कि बघेल को राजनीतिक द्वेष के चलते झूठे मामले में फंसाया गया। उनके अनुसार भूपेश बघेल ने न तो किसी प्रकार की सीडी बनवाई और न ही उसका वितरण किया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि बघेल द्वारा कोई आपराधिक कृत्य नहीं किया गया है।
अदालत ने हालांकि इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए मामले में पुनः सुनवाई के आदेश दिए।
इस मामले में कारोबारी कैलाश मुरारका और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने भी स्वयं को आरोपों से मुक्त करने के लिए आवेदन दायर किया था। अदालत दोनों के आवेदन खारिज कर दिए। अदालत का कहना है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिसके आधार पर उन्हें सुनवाई का सामना करना होगा।
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा कारोबारी कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं। मामले के एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने मामला उजागर होने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
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