लखनऊ , नवंबर 21 -- उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी के चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कालेज की कार्यवाहक प्रधानाचार्य के निलंबन आदेश को नामंजूर करने के मामले में लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक (डी आई ओ एस) द्वितीय के आदेश को रद्द कर दिया।

न्यायालय ने मामले को डीआईओएस को वापस भेजकर, कालेज प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य को सुनवाई का समुचित मौका देकर छह सप्ताह में नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कालेज के प्रबंधक पवन वर्मा व एक अन्य व्यक्ति की याचिका को मंजूर करके दिया।

याचिका में लखनऊ की प्रभारी डीआईओएस द्वितीय के नौ जुलाई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत कालेज की कार्यवाहक प्रधानाचार्य डा सुमन शुक्ला को प्रबंध समिति द्वारा निलंबित करने के आदेश को नामंजूर कर दिया था।

दरअसल एक मार्च 2024 को डा सुमन शुक्ला ने कालेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार ग्रहण किया। उनके खिलाफ मिली कुछ शिकायतों पर जांच के बाद कालेज की प्रबंध समिति ने डा सुमन शुक्ला को निलंबित कर दिया और निलंबन आदेश को मंजूरी के लिए लखनऊ के डी आई ओ एस द्वितीय को भेजा था। जिसे गत नौ जुलाई को डीआईओएस ने नामंजूर कर दिया था।

याचिकाकर्ता- कालेज की प्रबंध समिति की और से कहा गया कि समिति को मामले में सुनवाई का पूरा मौका दिए बगैर, डी आई ओ एस ने यह आदेश पारित कर दिया, जो कानून की मंशा के खिलाफ था।

डा सुमन शुक्ला की ओर से याचिका का विरोध किया गया। कोर्ट ने कहा कि नौ जुलाई के प्रश्नगत आदेश से साफ है कि इसे प्रभारी डी आई ओ एस मनीषा द्विवेदी ने पारित किया लेकिन इससे पहले कानून के मुताबिक सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि यह समझ से परे है कि याची प्रबंध समिति को सुनवाई का मौका दिए बगैर, आदेश पारित करने की जल्दी क्यों थी। ऐसे में पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है। लिहाजा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होने की वजह से नौ जुलाई का आदेश रद्द किया जाता है।

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