श्रीनगर , दिसंबर 10 -- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने अब्दुल गनी भट्ट (82) द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर उन पर अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
इसके साथ ही उन्हें आदतन और परेशान करने वाला याचिकाकर्ता बताते हुए कहा कि उसने जजों, न्यायिक अधिकारियों और यहां तक कि अपनी बहू के खिलाफ भी निराधार केस दायर करके न्यायिक प्रक्रिया का बार-बार दुरुपयोग किया है।
न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल ने आठ दिसंबर को आदेश सुनाते हुए याचिकाकर्ता के अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत, लेकिन एक ही तरह के आरोपों पर आधारित आधारहीन याचिकाएं दायर करने के "परेशान करने वाले तरीके " पर गहरी चिंता व्यक्त की।
न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि भट्ट "अपना ज़्यादातर समय कोर्ट में" बिता रहे हैं और उन्होंने न्यायिक अधिकारियों और परिवार के सदस्यों के खिलाफ "मनगढ़ंत, अभद्र और अपमानजनक आरोप" लगाने की आदत बना ली है। यह याचिका भट्ट ने अपने बेटे की ओर से अटॉर्नी होल्डर के तौर पर दायर की थी, जिसमें अपनी बहू के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके साथ ही निचली न्यायपालिका के पीठासीन अधिकारियों से स्पष्टीकरण और अवमानना कार्रवाई की भी मांग की गई थी।
न्यायालय ने पाया कि मांगी गई राहतें कानूनी रूप से मान्य नहीं थीं और यह न्यायिक अधिकारियों को परेशान करने की कोशिश थी।आदेश में कहा गया है कि भट्ट ने पिछले कुछ वर्षाे में इसी मुद्दे पर कई याचिकाएं दायर की हैं। पिछली पीठ ने तो उन्हें "न्यायिक प्रणाली के लिए कैंसर" तक कह दिया था और इस साल की शुरुआत में उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। समान आरोप लगाने के बाद उनकी सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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