जयपुर , जनवरी 20 -- राजस्थान में संयुक्त अभिभावक संघ ने आरोप लगाया है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत स्कूलों में बच्चों को दाखिले नहीं दिये जा रहे हैं।

संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने मंगलवार को अपने बयान में यह आरोप लगाते हुए कहा कि यह न केवल सरकार और विभागीय उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना भी है। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा गत आठ जनवरी को सूचना का अधिकार के तहत दाखिले को लेकर दिये गये स्पष्ट आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग ने अब तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। न्यायालय के आदेश केबाद भी सत्र 2025-26 के तहत लंबित लगभग 44 हजार बच्चों के दाखिलों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी हैं।

उन्होंने कहा कि सत्र 2025-26 के दाखिले अब तक पूरे नहीं हुए हैं और नये सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है, जो न केवल अनुचित है बल्कि न्यायालय की भावना और आदेशों के भी विपरीत है।

संघ ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल प्रशासन ने पिछले नौ महीने 'मामला न्यायालय में है', का बहाना बनाकर आरटीई के तहत दाखिले नहीं दिए और अब जब न्यायालय का स्पष्ट और अंतिम निर्णय आ चुका है, तो वही स्कूल यह कहकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं कि यह आदेश 'अगले सत्र के लिए लागू होगा' तो कुछ स्कूल कह रहे हैं शिक्षा विभाग से अभी कोई आदेश नहीं आया, जब कोई आदेश आएगा तब देखेंगे।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद शिक्षा विभाग को स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। उन्होंने मांग की कि जब तक सत्र 2025-26 के सभी लंबित दाखिले पूर्ण नहीं हो जाते तब तक सत्र 2026-27 की नयी प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित होने पर संयुक्त अभिभावक संघ द्वारा अभिभावकों और बच्चों के हित में संघर्ष को और अधिक तेज किया जाएगा।

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