बेंगलुरु , अक्टूबर 28 -- न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू ने मंगलवार को यहां कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू ने न्यायमूर्ति गंजू को पद की शपथ दिलाई।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस साल अगस्त में न्यायमूर्ति गंजू के दिल्ली उच्च न्यायालय से स्थानांतरण की सिफारिश की थी और केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को स्थानांतरण की अधिसूचना जारी की थी।

इस फैसले का दिल्ली बार एसोसिएशन के एक वर्ग ने विरोध किया था। दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, उसके महिला वकील समूह और कई अन्य वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई को पत्र लिखकर इस स्थानांतरण पर अपनी असहमति व्यक्त की थी।

वर्ष 1971 में जन्मी न्यायमूर्ति गंजू ने 1995 में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय से विधि स्नातक की उपाधि हासिल की। वर्ष 1999 में ब्रिटिश शेवनिंग छात्रवृत्ति प्राप्त करने के बाद उन्होंने ब्रिटेन में आगे की कानूनी पढ़ाई की।

वह 1995 से कानूनी प्रैक्टिस में हैं और मुख्य रूप से दिल्ली उच्च न्यायालय में विभिन्न मामलों में पेश हुई हैं जिनमें मूल, अपीलीय और रिट क्षेत्राधिकारों में दीवानी, फौजदारी, संपत्ति विवाद, उत्तराधिकार कानून, मध्यस्थता, कंपनी और बौद्धिक संपदा से संबंधित मामले शामिल हैं। उन्हें 18 मई 2022 को दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

उनका स्थानांतरण दिल्ली उच्च न्यायालय में एक भावुक विदाई समारोह के एक दिन बाद हुआ है जहां न्यायमूर्ति गंजू अपनी बेटी को रोते हुए देखकर भाषण के दौरान कुछ देर के लिए रुकी थीं। उन्होंने कहा,"अगर तुम रोओगी, तो मैं भी रोऊँगी।" इस पर उपस्थित लोगों ने गर्मजोशी से प्रतिक्रिया दी।

शपथ ग्रहण समारोह के साथ न्यायमूर्ति गंजू ने औपचारिक रूप से कर्नाटक उच्च न्यायालय में अपना कार्यभार संभाल लिया है।

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