नयी दिल्ली , अक्टूबर 31 -- भारतीय नौसेना अगले वर्ष फरवरी में विशाखापत्तनम में तीसरा अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण समारोह (आईएफआर)आयोजित करेगी जिसमें अमेरिका, रूस , जापान और आस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों सहित 50 से अधिक देशों की नौसेना और उनके युद्धपोत हिस्सा लेंगे। तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अंतर्राष्ट्रीय बेड़े का निरीक्षण करेंगी और बेड़े में शामिल विभिन्न नौसेनाओं के जहाजों की सलामी लेंगी।
अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण समारोह के साथ साथ 'मिलन अभ्यास -2026' तथा अनेक देशों की नौसेनाओं के प्रमुखों का सम्मेलन (हिन्द महासागर नौसेना सम्मेलन) आईओएन भी आयोजित किया जायेगा। भारतीय नौसेना इससे पहले दो बार वर्ष 2001 में मुंबई में और 2016 में विशाखापत्तनम में अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण का आयोजन कर चुकी है। ये तीनों अंतर्राष्ट्रीय आयोजन अगले वर्ष 15 से 25 फरवरी तक आयोजित किये जायेंगे।
नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने शुक्रवार को यहां पूर्वावलोकन समारोह में संवाददाताओं को बताया कि आईएफआर समारोह 17 फरवरी से विशाखापत्तनम में होगा और 18 फरवरी को राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में बेड़े में शामिल जहाजों की सलामी लेंगी। उन्होंने कहा कि आईएफआर का थीम "महासागर के माध्यम से एकजुटता" रखा गया है। इसके अगले दिन 19 फरवरी को सिटी परेड का आयोजन किया गया है जिसमें तीनों सेनाओं और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की परेड तथा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा झांकियां शामिल होंगी। साथ ही नौसेना की समुद्री तथा हवाई शक्ति का भी प्रदर्शन किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि आई एफआर में स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और कलवारी श्रेणी की पनडुब्बियों सहित अनेक प्रमुख स्वदेशी युद्धपोत हिस्सा लेंगे। इनमें विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक, नीलगिरी श्रेणी के फ्रिगेट और अरनाला श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत शामिल है। इसके अलावा भारतीय तटरक्षक बल के युद्धपोत भी समारोह में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य भारत के 'महासागर' के विजन को मूर्त रूप देना तथा देश की स्वदेशी नौसेना क्षमता के प्रदर्शन के साथ साथ क्षेत्र में अपने आपको प्रमुख सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करना है।
नौसेना उप प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना ने पहला बेड़ा निरीक्षण समारोह 1953 में किया था। बेड़ा निरीक्षण समारोह अक्सर हर पांच वर्ष में और अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण हर दस वर्ष में आयोजित किया जाता है।
मिलन अभ्यास का आयोजन 19 फरवरी को किया जायेगा इसके दौरान विभिन्न हथियारों की फायरिंग के कौशल का परीक्षण किया जायेगा और युवा अधिकारियों के लिए विभिन्न प्लेटफार्म पर संक्षिप्त प्रशिक्षण अवसर भी होंगे। अभ्यास के समुद्री चरण में कुछ जटिल अभियानों को भी शामिल किया जायेगा।
इसके साथ ही 20 फरवरी को अनेक देशों की नौसेनाओं के प्रमुखों का सम्मेलन (हिन्द महासागर नौसेना सम्मेलन) आईओएन भी आयोजित किया जायेगा। समुद्री सहयोग बढाने के उद्देश्य पर आधारित यह सम्मेलन 2008 में शुरू हुआ था। इस सम्मेलन में 25 सदस्य देश और नौ पर्यवेक्षक देश शामिल हैं। इस बार के सम्मेलन में भारत इसकी अध्यक्षता ग्रहण करेगा जिसकी अवधि 2028 तक रहेगी।
वाइस एडमिरल वात्सायन ने सवालों के जवाब में कहा कि आईएफआर का मुख्य संदेश यह है कि भले ही ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है लेकिन अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ संवाद, अभ्यास और योजनाओं में कोई रुकावट या विराम नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नौसेना ऑपरेशन सिंदूर के लिए तैयार और तैनात हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आईएफआर के लिए बड़ी संख्या में देशों को निमंत्रण भेजा गया है और अब तक 55 से ज़्यादा देशों से सकारात्मक जवाब मिला है । अनेक देशों ने तीनों कार्यक्रमों में शामिल होने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नौसेनाएं अपने जहाज़ भेजने के साथ-साथ उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भेज रही हैं।
उन्होंने कहा कि आईएफआर में शामिल होने वाले देशों की अभी सही संख्या नहीं बतायी जा सकती क्योंकि यह आने वाले महीनों की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इसमें 50 से अधिक देशों की नौसेनाएं हिस्सा लेंगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस दोनों ही इसमें भाग ले रहे हैं और वे अपने विमान भी भेजेंगे। यह भी बताया गया कि जापान और आस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने भी आईएफआर में शामिल होने की पुष्टि की है।
एक अन्य सवाल के जवाब में नौसेना उप प्रमुख ने कहा कि नौसेना के बेड़े में इस वर्ष अब तक 10 युद्धपोत और एक पनडुब्बी शामिल की गयी और वर्ष के अंत से पहले चार और युद्धपोत शामिल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में 19 और 2027 में 13 युद्धपोतों के नौसेना के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है।
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