नयी दिल्ली , अक्टूबर 21 -- नौसेना के शीर्ष कमांडर बुधवार से तीन दिन तक यहां भविष्य की चुनौतियों से निपटने और हिन्द महासागर तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र के खतरों से निपटने की रणनीति पर गहन चर्चा करेंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कमांडरों को संबोधित करेंगे।

नौसेना के प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि नौसेना के शीर्ष कमांडरों के तीन दिन के सम्मेलन का दूसरा संस्करण बुधवार को यहां शुरू होगा।

'ऑपरेशन सिंदूर' और नौसेना को अभियानों तथा युद्ध के लिए तैयार रखने की पृष्ठभूमि में हो रहे इस सम्मेलन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल के साथ युद्ध क्षमताओं, अंतर-संचालन क्षमता और संयुक्त अभियानों को बढ़ाने पर नौसेना का ध्यान, उभरते खतरों को रोकने और हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री कौशल का प्रदर्शन करने के उसके संकल्प को रेखांकित करता है।

सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री तथा कैबिनेट सचिव नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे और व्यापक राष्ट्रीय हितों और विकसित भारत 2047 के प्रति अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। यह सम्मेलन राष्ट्रीय नेतृत्व और नौकरशाहों के साथ घनिष्ठ संपर्क के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है और मौजूदा भू-रणनीतिक परिदृश्य में बहुआयामी चुनौतियों को कम करने के प्रति नौसेना के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।

सम्मेलन में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष और वायु सेना प्रमुख के संबोधन और वरिष्ठ नौसेना नेतृत्व के साथ गहन चर्चाएं भी होंगी। इन संवादों का उद्देश्य अभियानों की संयुक्त योजना और क्रियान्वयन में परस्पर तालमेल और क्षमता वृद्धि करना है।

नौसेना प्रमुख, कमांडर-इन-चीफ के साथ, हिंद महासागर क्षेत्र में समग्र सुरक्षा स्थिति से संबंधित योजनाओं की समीक्षा और मूल्यांकन करेंगे। मौजूदा परिदृश्य में विभिन्न ऑपरेशन कार्यों के लिए नौसेना संचालन, प्रशिक्षण और संसाधन-उपलब्धता भी चर्चा के एजेंडे में शामिल होंगे। कमांडर भविष्य की संभावनाओं के लिए नौसेना के रोडमैप पर भी गहन चर्चा करेंगे, जिसमें बेहतर ऑपरेशन लॉजिस्टिक्स और डिजिटलीकरण शामिल हैं। युद्ध समाधानों और सुरक्षित वातावरण में निरंतर निर्बाध संचालन के लिए विघटनकारी प्रौद्योगिकियों जैसे एआई, बिग डेटा और एमएल की समीक्षा करने के लिए चर्चा की योजना बनाई गई है।

व्यापक स्तर पर, नौसेना का शीर्ष नेतृत्व पश्चिमी और पूर्वी समुद्री तटों पर अपनी परिचालन तैयारियों की समीक्षा करेगा, मेक इन इंडिया योजना के तहत स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा देगा, भारत सरकार के महासागर (सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा।

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