नयी दिल्ली , मार्च 26 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार 28 मार्च को नोएडा के जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे और एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को बताया कि श्री मोदी 28 मार्च सुबह लगभग 11:30 बजे गौतम बुद्ध नगर में जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे वह नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करेंगे और इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है, जो दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का पूरक है।
सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ये दोनों हवाई अड्डे मिलकर एक एकीकृत विमानन प्रणाली के रूप में कार्य करेंगे, जिससे दोनों हवाई अड्डों पर बोझ बढ़ जायेगा, यात्री क्षमता बढ़ेगी और दिल्ली-एनसीआर को वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में अग्रणी स्थान हासिल करेगा।
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में से एक है। नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत लगभग 11,200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है। प्रारंभिक चरण में हवाई अड्डे की संचालन क्षमता 1.2 करोड़ यात्री प्रति वर्ष (एमपीपीए) होगी, जो हवाई अड्डे के पूर्ण विकसित होने तक 70 एमपीपीए तक हो जायेगी।
नोएडा हवाई अड्डे का रनवे 3,900 मीटर लंबा है जो बड़े आकार के विमानों के संचालन में सक्षम है। इसके साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग सहित यहां आधुनिक नेविगेशन सिस्टम हैं, जो हर मौसम में दिन-रात संचालन में सक्षम है।
इस हवाई अड्डे के साथ एक सुदृढ़ कार्गो प्रणाली भी है, जिसमें एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब, एकीकृत कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन शामिल हैं। यहां प्रति वर्ष 2.5 लाख टन से अधिक माल ढुलाई हो सकती है। बाद में क्षमता को बढ़ाकर। 18 लाख टन किया जाएगा।
इसमें 40 एकड़ का एक समर्पित रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा क्षेत्र भी शामिल है।
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापत्य शैली भारतीय विरासत से प्रेरित है, जो पारंपरिक घाटों और हवेलियों की याद दिलाते हैं जिससे सांस्कृतिक सौंदर्यशास्त्र आधुनिक अवसंरचना के साथ मिश्रित होता है।
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