नोएडा , मार्च 10 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 113 थाना पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए देश-विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक फर्जी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह क्रूज शिप और अन्य कंपनियों में आकर्षक वेतन वाली नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से हजारों रुपये की ठगी कर रहा था।

पुलिस ने मंगलवार को गिरोह का खुलासा कर जानकारी दी। उन्होंने ने बताया कि सेक्टर-113 थाना पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए नोएडा सेक्टर-73 स्थित एंथूरियम बिजनेस पार्क में छापा मारकर पूरे गिरोह को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पांच मॉनिटर, पांच कीबोर्ड, पांच सीपीयू, पांच माउस, एक राउटर, दो मोहर, दो चेकबुक, दो सिम कार्ड, एक एटीएम कार्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सरीम खान, शोएब खान, रितिका, मन्तसा अब्बासी, फातिमा और खुशी उर्फ खुशबू के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन मुख्य आरोपी सरीम खान और शोएब खान कर रहे थे।

ये दोनों आरोपी "एम/एस रिक्रूट सर्विस" नाम से फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भुगतान कर "वी आर हायरिंग" जैसे विज्ञापन का चलाते थे। इन विज्ञापनों के जरिए नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को टारगेट किया जाता था।

आरोपी पहले इच्छुक उम्मीदवारों से ऑनलाइन फॉर्म भरवाते थे और फिर उन्हें क्रूज शिप या विदेश की कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। इसके बदले उनसे 40 हजार से 60 हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती थी।

पैसे लेने के बाद आरोपी पीड़ितों को ई-मेल के माध्यम से फर्जी जॉइनिंग लेटर भेज देते थे, जिससे पीड़ितों को विश्वास हो जाता था कि उनकी नौकरी लग गई है। बाद में जब पीड़ितों को ठगी का पता चलता तो आरोपी उनसे संपर्क तोड़ लेते थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने सेक्टर-73 स्थित एंथूरियम बिजनेस पार्क में किराये पर एक ऑफिस ले रखा था। इसी ऑफिस से सोशल मीडिया विज्ञापन चलाने, लोगों से संपर्क करने और ठगी की पूरी गतिविधि संचालित की जा रही थी।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सेक्टर-113 थाना में भारतीय न्याय संहिता भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की कुल रकम कितनी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर नौकरी से जुड़े किसी भी विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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