नोएडा , मार्च 25 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्पार्क मिंडा फाउंडेशन ने दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेक्टर 59 स्थित अपने मुख्यालय में 18 से 25 मार्च तक आठ दिवसीय मेगा कैंप का आयोजन किया। इस कैंप के माध्यम से छह हजार से अधिक दिव्यांगजनों तक व्यापक सहयोग पहुंचाया गया।

बुधवार को आयोजित मेगा कैंप में दिव्यांगजनों को उनकी जरूरतों के अनुसार कृत्रिम अंग, ऑर्थोटिक डिवाइसेज़, वॉकर, बैसाखियां, हैंड स्टिक, विजुअल और हियरिंग एड जैसे आवश्यक सहायक उपकरण वितरित किए गए। इसके साथ ही विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र रजिस्ट्रेशन, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार और उद्यमिता से जुड़ी सेवाएं भी प्रदान की गईं, जिससे लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सके।

कार्यक्रम आयोजन के दौरान संस्थापकों ने जानकारी दी कि फाउंडेशन की प्रमुख पहल 'सक्षम' के तहत वर्ष 2015 से अब तक देशभर में 38,000 से अधिक दिव्यांगजनों को सशक्त किया जा चुका है। इसी पहल के अंतर्गत स्पार्क मिंडा ग्रुप ने 1300 से अधिक दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।

पिछले एक दशक में यह अभियान भारत के कई राज्यों-उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर-के साथ-साथ इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों तक भी पहुंच चुका है।

स्पार्क मिंडा फाउंडेशन ने अपने 'सक्षम दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम' के माध्यम से वर्ष 2030 तक पचास हजार से अधिक दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य तय किया है।

फाउंडेशन की चेयरपर्सन सारिका मिंडा ने कहा कि सामूहिक प्रयास और संवेदनशील सोच से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है। उन्होंने सभी सहयोगी संस्थाओं और भागीदारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में और अधिक लोगों तक पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई।

वहीं अशोक मिंडा ने कहा कि शारीरिक बाधाएं किसी व्यक्ति की क्षमता को सीमित नहीं कर सकतीं। उन्होंने बताया कि स्पार्क मिंडा विविधता, समावेशन और समान अवसरों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि हर व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता को पहचान सके।

इस पहल को प्रभावी बनाने के लिए फाउंडेशन ने कई प्रमुख संस्थाओं के साथ साझेदारी की है, जिनमें जयपुर फुट, दिव्यांगजनों के लिए कौशल परिषद, राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम और सीआईआई-इंडियन बिजनेस एंड डिसेबिलिटी नेटवर्क, शामिल हैं। राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से इस अभियान को और मजबूती मिली है।

स्पार्क मिंडा को वर्ष 2024 में 'नेशनल अवॉर्ड फॉर पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज़' से भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, जो इसके समावेशी प्रयासों की पुष्टि करता है।

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