नोएडा , मार्च 06 -- त्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है। नोएडा पुलिस की अपराध नियंत्रण टीम विशेष हथियार और रणनीति दल(एस.डब्लू.ए.टी) टू टीम और थाना सेक्टर-113 पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चलाने में किया जा रहा था।

पुलिस ने शुक्रवार को गैंग का खुलासा कर जानकारी देते हुये बताया कि कि टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग चोरी-छिपे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बेटिंग ऐप के माध्यम से सट्टेबाजी का अवैध कारोबार चला रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

जिनकी पहचान दिल्ली गीता कॉलोनी निवासी,विनय सहगल,राजीव शर्मा,पंजाब निवासी,नवदीप सिंह,सलील सेठ, नेपाल निवासी देव कुमार की गई है।

इस पूरे गिरोह का सरगना विनय सहगल बताया जा रहा है, जो नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने सट्टेबाजी में इस्तेमाल किए जा रहे, तीन लैपटॉप, तीन टैबलेट, तीन डेस्कटॉप मॉनिटर, बत्तीस मोबाइल फोन, दो आईस रिकॉर्डर,प्रिंटर-स्कैनर,वाई-फाई राउटर,चार्जर और डेटा केबल,नोटपैड, आठ हजार रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।

इन उपकरणों के जरिए आरोपी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी का नेटवर्क संचालित करते थे और ग्राहकों से संपर्क बनाए रखते थे।

गिरोह के सदस्य मोबाइल कॉल, मैसेज और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ते थे। इसके बाद उनसे अलग-अलग मैचों पर पैसे लगवाए जाते थे। सट्टे से होने वाली रकम को फील्ड से इकट्ठा कर नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजा जाता था, जिससे गिरोह के सदस्य मोटा मुनाफा कमाते थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने हाल ही में चल रहे आईसीसी मेंस टी ट्वेंटी वर्ल्ड कप के मैचों पर भी बड़े पैमाने पर सट्टेबाजी कराई। खास तौर पर आईसीसी मेंस टी ट्वेंटी वर्ल्ड कप 2026 के भारत बनाम इंग्लैंड सेमीफाइनल मैच के दौरान ऑनलाइन और फोन कॉल के जरिए भारी मात्रा में बेटिंग कराई गई थी।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट, सार्वजनिक जुआ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर उनके डेटा की जांच की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के संपर्क में आने वाले अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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