लखनऊ/नोएडा , अप्रैल 16 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा में हालिया श्रमिक आंदोलन के दौरान फैली हिंसा और अराजकता को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह महज श्रमिक असंतोष का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसमें बाहरी तत्वों की सक्रिय भूमिका रही।
सूत्रों के अनुसार, अब तक हुई 66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग ऐसे पाए गए हैं, जो वास्तविक श्रमिक नहीं हैं। आगजनी की घटनाओं में चिन्हित 17 लोगों में से 11 को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 8 गैर-श्रमिक हैं। वहीं, भड़काने के आरोप में चिन्हित 32 में से 19 को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त 34 ऐसे लोगों को भी पकड़ा गया है, जो श्रमिक न होते हुए भी प्रदर्शन में शामिल होकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, साजिश रचने के आरोप में 4 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है, जिनके कुछ संगठित नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। मामले में कुछ संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स और बाहरी राज्यों से आए लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
सूत्रों का दावा है कि नोएडा के औद्योगिक ढांचे को प्रभावित करने के लिए व्यापक स्तर पर योजना बनाई गई थी। हिंसा के दौरान आगजनी, पथराव और उकसावे की घटनाओं में शामिल कई लोग स्थानीय श्रमिक नहीं थे, बल्कि बाहर से आए तत्व थे, जिनका उद्देश्य औद्योगिक माहौल को अस्थिर करना था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल सख्त कदम उठाए। पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से कुछ ही घंटों में हालात पर काबू पा लिया गया। इसके साथ ही श्रमिकों के हित में वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद मजदूरों और उद्योग प्रबंधन के बीच समन्वय स्थापित हुआ, जिससे औद्योगिक गतिविधियां तेजी से सामान्य हो गईं।
वर्तमान में नोएडा के अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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