नैनीताल , दिसंबर 11 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हुई हिंसा के मामले उच्च न्यायालय ने विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) को जांच सौंपने का अपना निर्णय फिलहाल टाल दिया है। अदालत ने अपराध शाखा आपराधिक जांच विभाग (सीबीसीआईडी) को जांच के लिए फिलहाल 17 दिसंबर तक का अतिरिक्त समय दिया है।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इस मामले को लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आज महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कहा कि जांच लंबित है। जांच टीम को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने जनहित याचिका पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि आपराधिक मामले में जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने कुछ समय पहले ही इस मामले को सीबीसीआईडी को सौंपा है। जांच चल रही है और जांच टीम को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। अंत में अदालत ने सीबीसीआईडी को 17 दिसंबर तक की मोहलत दी है।

उल्लेखनीय है कि कल सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीसीआईडी की जांच पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा था कि अदालत इस प्रकरण की जांच एसआईटी को सौंपेगी और उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की जाएगी। अदालत ने इस मामले में बकायदा आदेश जारी करने को कहा था।

विगत 14 अगस्त को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान के दौरान कांग्रेस और भाजपा समर्थकों में जबरदस्त झड़प हो गई थी। इस दौरान आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता पांच जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण कर अपने साथ ले गए। कांग्रेस नेताओं की शिकायत पर उच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर कर ली।

अदालत के सख्त रुख को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कुछ समय पहले इस प्रकरण को जांच के लिए सीबीसीआईडी को सौंप दिया था।

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