नैनीताल , नवंबर 29 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में हिंसा के मामले में बुधवार को पांचों जिला पंचायत सदस्य पेश नहीं हुए। अब सभी को 10 दिसंबर को पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेन्दर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इसी साल 14 अगस्त को नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में हुई कथित हिंसा के मामले में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई पर अदालत ने अपहृत पांचों जिला पंचायत अध्यक्ष और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे। अदालत ने पुलिस से प्रकरण की जांच की प्रगति रिपोर्ट भी पेश करने को कहा था।

नैनीताल के एसएसपी डाॅ. मंजूनाथ टीसी आज अदालत में पेश हुए लेकिन मामले से जुड़े जिला पंचायत अध्यक्ष पेश नहीं हो हुए। एसएसपी ने जांच को लेकर कहा कि प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच पुलिस से सीबीसीआईडी को सौंप दी है। इसीलिए पुलिस की जांच में कोई भूमिका नहीं है।

इसके बाद अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तिथि तय कर दी और पांचों जिला पंचायत सदस्यों के साथ ही सीबीसीआईडी के एसपी को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

आज भी जांच अधिकारी की ओर से कहा गया कि मामले की जांच चल रही है। 33 आरोपियों को चिह्नित किया गया है। इनमें से दो को गिरफ्तार किया गया है। इसके बावजूद अदालत जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आयी।

उल्लेखनीय है कि कि विगत 14 अगस्त को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान नैनीताल में कांग्रेस और भाजपा समर्थकों में जबरदस्त झड़प हो गई थी। इस दौरान आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता पांच जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण कर अपने साथ ले गए। कांग्रेस नेताओं की शिकायत पर उच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है।

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