नैनीताल , नवंबर 10 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में हिंसा के मामले उच्च न्यायालय अपराध शाखा अपराध जांच विभाग (सीबीसीआईडी) की जांच से संतुष्ट नहीं है और अदालत ने इस प्रकरण को विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने का निर्णय लिया है। अदालत ने कहा कि एसआईटी जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में होगी।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है। आज पांच जिला पंचायत सदस्य खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। साथ ही सीबीसीआईडी की ओर से अभी तक की जांच रिपोर्ट खंडपीठ को सौंपी गई। अदालत जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नजर नहीं आयी।

इसके साथ ही अदालत ने पांचों जिला पंचायत सदस्यों से हिंसा के मामले में सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि उनका अपहरण नहीं हुआ था। वह अपनी मर्जी से गये थे। उन्होंने स्वेच्छा से मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

अदालत ने जांच की प्रगति में असंतोष जाहिर किया और जांच के तरीके पर सवाल उठाए। आखिरकार मुख्य न्यायाधीश ने अदालत में कहा कि इस मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में एसआईटी करेगी।

अदालत ने इस संदर्भ में हालांकि कोई आदेश पारित नहीं किया। अदालत ने कहा कि चेम्बर में आदेश पारित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि विगत 14 अगस्त को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में मतदान के दौरान नैनीताल में कांग्रेस और भाजपा समर्थकों में जबरदस्त झड़प हो गई थी। इस दौरान आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता पांच जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण कर अपने साथ ले गए। कांग्रेस नेताओं की शिकायत पर उच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर कर ली। कुछ समय बाद सरकार ने इस प्रकरण को जांच के लिए सीबीसीआईडी को सौंप दिया था।

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