नैनीताल , दिसंबर 15 -- नैनीताल से 22 किलोमीटर दूर भीमताल स्थित विकास भवन में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सोमवार को राज्य, केंद्र एवं बाह्य सहायतित योजनाओं तथा 20 सूत्री कार्यक्रम की मासिक समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने विकास कार्यों की विभागवार वित्तीय व भौतिक प्रगति की गहन समीक्षा की।

जिलाधिकारी ने जिन विभागों की प्रगति धीमी पाई गई और जहां लक्ष्य के सापेक्ष कम धनराशि व्यय हुई, उन विभागीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेते हुए 15 दिन में प्रगति में सुधार का निर्देश दिया। जिला योजना अंतर्गत उद्योग विभाग, लोक निर्माण विभाग, लघु सिंचाई, समाज कल्याण एवं चिकित्सा विभाग द्वारा कम व्यय पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और अगले सप्ताह तक प्रगति सुनिश्चित करने को कहा।

राज्य योजना अंतर्गत विधायक निधि में कम व्यय को लेकर जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि सभी विधायकों से शीघ्र प्रस्ताव प्राप्त करने हेतु अर्धशासकीय पत्र भेजे जाएं तथा व्यक्तिगत रूप से भी संपर्क किया जाए। इसके साथ ही जल संस्थान, समाज कल्याण (अनुसूचित जाति कल्याण), पर्यटन, प्राथमिक शिक्षा एवं जिला पंचायत की धीमी प्रगति पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो अधिकारी गंभीरता और जिम्मेदारी से कार्य नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में 20 सूत्री कार्यक्रम की भी मदवार समीक्षा की गई। वर्तमान में 42 मदों में से 26 मद ए श्रेणी, 12 मद बी श्रेणी और 4 मद डी श्रेणी में हैं। डीएम ने बी एवं डी श्रेणी वाले विभागों को ठोस कदम उठाकर ए श्रेणी में लाने का निर्देश दिया। जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और बायोगैस संयंत्र से जुड़े विभागों की डी श्रेणी पर उन्होंने विशेष नाराजगी व्यक्त की।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी और लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। जिला योजना अंतर्गत प्राप्त धनराशि को फरवरी माह तक शत-प्रतिशत व्यय करना सुनिश्चित किया जाए और मार्च का इंतजार न किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्यों में कार्य प्रारंभ होने से पूर्व और पूर्ण होने के बाद जीपीएस युक्त फोटोग्राफ उपलब्ध कराए जाएं तथा थर्ड पार्टी सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाए। कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करें।

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