बेंगलुरु , फरवरी 05 -- कर्नाटक में कांग्रेस में एक नया अंदरूनी गठबंधन पार्टी के समीकरणों को धीरे-धीरे बदल रहा है, जबकि शीर्ष नेतृत्व एकता दिखाने की कोशिश कर रहा है।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति और लिंगायत समुदायों के विधायकों ने बेंगलुरु में अलग-अलग बैठकें करना शुरू कर दिया है, जिससे सत्ताधारी पार्टी के अंदर 'तीसरे मोर्चे' के उभरने की अटकलें लगाई जा रही हैं। लिंगायत विधायकों ने सोमवार रात उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल के नेतृत्व में बैठक की, जबकि एससी और एसटी विधायकों ने मंगलवार शाम गृह मंत्री जी. परमेश्वर के आवास पर बैठक की।
ये घटनाक्रम मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच चल रही सत्ता की खींचतान के बीच हो रहे हैं। यह प्रतिद्वंद्विता लगभग एक साल से चल रही है। श्री शिवकुमार खेमे का कहना है कि मुख्यमंत्री पद को बीच में बदलाव करने को लेकर सहमति बनी थी। इस दावे को श्री सिद्दारमैया के समर्थकों ने खारिज कर दिया है। इस मुद्दे को कई बार कांग्रेस आलाकमान के सामने उठाया गया है और मतभेद को खत्म करने की कोशिशें की गयी हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सलाह-मशविरे का यह नया दौर अपना संख्या बल दिखाने और सरकार में ज़्यादा प्रतिनिधित्व के लिए दबाव बनाने के मकसद से किया जा रहा है, जिसमें संभावित कैबिनेट फेरबदल और, शायद, मुख्यमंत्री का पद भी शामिल है।
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