जबलपुर , नवंबर 7 -- मध्यप्रदेश में बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय, मुख्यपीठ जबलपुर ने शुक्रवार को विधानसभा सभापति नरेंद्र सिंह तोमर और विधायक निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि विधायक निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की सदस्यता त्यागकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा सभापति के समक्ष उनकी सदस्यता निरस्त करने के लिए याचिका प्रस्तुत की थी, जिस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया था।

सभापति द्वारा निर्णय न किए जाने के कारण उमंग सिंघार ने उच्च न्यायालय की शरण ली। याचिका की सुनवाई आज मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने नोटिस जारी करते हुए सभापति एवं विधायक निर्मला सप्रे से जवाब मांगा है।

राज्य की ओर से पैरवी महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने की, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्री विभोर खंडेलवाल एवं जयेश गुरनानी ने पैरवी की। अगली सुनवाई 18 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने महाधिवक्ता से पूछा कि जब नेता प्रतिपक्ष द्वारा दी गई दल-बदल संबंधी याचिका को 16 महीने बीत चुके हैं, तो सभापति ने अब तक निर्णय क्यों नहीं लिया। न्यायालय ने 'पाडी कौशिक रेड्डी बनाम तेलंगाना राज्य' एवं 'केशम बनाम मणिपुर राज्य' के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे प्रकरणों का निराकरण तीन माह के भीतर किया जाना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सभापति उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं और भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची तथा अनुच्छेद 191(2) के अनुसार दल-बदल करने वाले विधायक की सदस्यता निरस्त की जानी चाहिए। न्यायालय ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए नोटिस जारी किए और सभापति एवं विधायक सप्रे से जवाब तलब किया है।

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