कोलकाता , जनवरी 20 -- निर्वाचन आयोग द्वारा 'अनमैप्ड मतदाता' के रूप में चिन्हित किये जाने और सुनवाई के लिये तलब किये जाने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने मंगलवार को मतदाता गणना प्रपत्र में पूरी जानकारी न भरने के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया।
उल्लेखनीय है कि श्री बोस को मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सूची से संबंधित दावों और आपत्तियों की सुनवाई के सिलसिले में तलब किया गया था। यह विवाद रविवार शाम सामने आया, जिसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया।
चुनाव आयुक्त कार्यालय के अनुसार, श्री बोस को 'अनमैप्ड' मतदाता इसलिए चिन्हित किया गया क्योंकि उनके गणना प्रपत्र में 2002 मतदाता सूचि से 'संबंध' स्थापित करने वाला हिस्सा भरा नहीं गया था।
कार्यालय ने अपने बयान में कहा, "गणना प्रपत्र में स्पष्ट रूप से दिखता है कि संबंध (लिंकेज) वाला हिस्सा खाली छोड़ा गया है।इसलिए चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार उन्हें अन्य समान स्थिति वाले मतदाताओं की तरह सुनवाई के लिए बुलाया गया है।"चुनाव आयुक्त कार्यालय की अधिसूचना पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री बोस ने सोशल मीडिया का रुख कर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, "न तो मुझसे कोई गलती हुई और न ही मैंने 2002 से लिंक करने वाला कॉलम बिना कारण खाली छोड़ा।"उन्होंने कहा कि प्रपत्र भरते समय चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध करायी गयी 2002 की एसआईआर सूची में उनका नाम नहीं था। इसी वजह से अधिकारियों ने उन्हें फॉर्म पर लिंकेज वाला हिस्सा खाली छोड़ने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा, "बाद में 'गणना प्रपत्र' जमा करने के बाद 2002 की एसआईआर की एक अन्य सूची में मेरा नाम पाया गया। मैंने इस जानकारी को सुधारने का अनुरोध किया था, लेकिन स्पष्ट रूप से यह संभव नहीं हो सका। 'गणना प्रपत्र' में सुधार करके से इस पूरी उलझन से बचा जा सकता था।"उन्होंने इस स्थिति के लिए प्रणालीगत खामियों को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि प्रक्रिया जल्दबाजी में और कर्मियों के पर्याप्त प्रशिक्षण के बिना पूरी की गई।
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