नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में होने वाले पांच दिवसीय नृत्यरचना महोत्सव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा और नावाचार का अनूठा संगम दिखेगा।
यह जानकारी पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह समेत कई नृत्य गुरुओं ने मंगलवार को यह जानकारी दिल्ली सरकार (एनसीटी) के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग द्वारा सेंटर फ़ॉर इंडियन क्लासिकल डांसेज़ (श्री कामाख्या कलापीठ) के सहयोग से आयोजित होने वाले 'फेस्टिवल ऑफ न्यू कोरियोग्राफ़ीज़ (नृत्यरचना महोत्सव) - कलायात्रा 2026' के औपचारिक पुनरावलोकन (कर्टेन रेज़र) के अवसर पर दी। यह अपनी तरह का पहला पांच दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए दस प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य समूह भाग ले रहे हैं।
इस महोत्सव का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं में निहित सनातन मूल्यों, इतिहास और सभ्यतागत चेतना को नई और समकालीन कोरियोग्राफ़िक अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत करना है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि नवाचार यदि परंपरा से जुड़ा हो, तो वह सांस्कृतिक धरोहर को और सशक्त बनाता है।
प्रमुख वक्ताओं में कथकली, कुचिपुड़ी, कथक, सत्रिया और मोहिनीअट्टम जैसी शैलियों के प्रसिद्ध गुरु शामिल रहे। इस अवसर पर डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि "फेस्टिवल ऑफ न्यू कोरियोग्राफ़ीज़ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत संवाद है। हमारी शास्त्रीय परंपराओं को जीवंत, संवेदनशील और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नई कोरियोग्राफ़ियां आवश्यक हैं। जब नवाचार हमारी सांस्कृतिक बुद्धि और जीवन के अनुभवों से जुड़ा होता है, तब वह परंपरा का विस्तार बनता है, न कि उससे विच्छेद।" उन्होंने बताया कि कलायात्रा 2026 ऐसे मंच के रूप में विकसित की गई है, जहां युवा और वरिष्ठ कलाकार समान रूप से भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कथाओं को समकालीन संदर्भों के साथ प्रस्तुत करेंगे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित