लखनऊ , मार्च 12 -- किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के विभाग प्रमुख प्रो.वेद प्रकाश ने कहा कि नींद से जुड़ी बीमारियों की समय पर पहचान बेहद जरूरी है, क्योंकि इसके कारण हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, शुगर और मोटापे जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

विश्व नींद दिवस 2026 से एक दिन पूर्व आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में प्रो.वेद प्रकाश ने कहा कि इस वर्ष की थीम "अच्छी नींद लें, बेहतर जीवन जिएं" रखी गई है। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर लगभग 10 प्रतिशत वयस्क अनिद्रा से ग्रसित हैं, जबकि 3 से 7 प्रतिशत लोग ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) से पीड़ित हैं। यह बीमारी अक्सर लंबे समय तक पहचान में नहीं आती और हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग तथा दिमाग से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा कि नींद की कमी और अनियंत्रित स्लीप एपनिया के कारण दिन में अत्यधिक नींद आती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया भर में करीब 45 प्रतिशत लोग नींद की कमी के दुष्प्रभावों को महसूस करते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में दिन में अत्यधिक नींद आना, रात में बार-बार जागना, खर्राटे आना, सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन और याददाश्त में कमी शामिल हैं।

प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए 10-3-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह दी। इसके अनुसार सोने से 10 घंटे पहले कैफीन से परहेज, 3 घंटे पहले भारी भोजन से बचाव, 2 घंटे पहले काम बंद करना, 1 घंटा पहले मोबाइल व स्क्रीन से दूरी बनाना और सुबह उठते समय स्नूज़ बटन का उपयोग न करना चाहिए।

इस दौरान प्रो.ऋषि सेठी ने कहा कि पर्याप्त नींद हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक है। वहीं श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि मेलाटोनिन हार्मोन नींद को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।कार्यक्रम में चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने समाज में नींद संबंधी विकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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