नयी दिल्ली , दिसंबर 15 -- सोना, पेट्रोलियम और कोयला आयात में गिरावट तथा अमेरिका को निर्यात में वृद्धि के चलते नवंबर में देश का व्यापार घाटा कम होकर 24.53 अरब डॉलर पर आ गया जो इसका पांच महीने का न्यूनतम स्तर है।

अक्टूबर में सोने के आयात में उछाल के चलते व्यापार घाटा 41.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। व्यापार घाटे की घट-बढ़ विनियम दर को प्रभावित करती है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी व्यापार के मासिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में देश का वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात अक्टूबर के 34.38 अरब डॉलर से बढ़कर 38.13 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि आयात 76.06 अरब डॉलर से घटकर 62.66 अरब डॉलर रहा।

इस तरह नवंबर में वाणिज्यिक वस्तुओं के व्यापार में घाटा (निर्यात पर आयात का आधिक्य) पांच माह के न्यूनतम स्तर 24.53 अरब डॉलर के बराबर रहा। आलोच्य माह में सोने, तेल और कोयले के आयात में गिरावट दर्ज की गयी तथा ऊंचे शुल्क से प्रभावित अमेरिकी बाजार में निर्यात में तेजी से सुधार हुआ।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने निर्यात क्षेत्र ने अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। चीन को छोड़कर दुनिया का व्यापार जहां बुरी तरह प्रभावित हुआ है, वहीं भारत के वाणिज्य निर्यात में वृद्धि बनी हुई है। उन्होंने कहा कि दिसंबर के प्रारंभिक आंकड़ों में भी वाणिज्यिक निर्यात में स्थायित्व दिख रहा है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, "अमेरिका में ऊंचे शुल्क के बावजूद वहां के बाजार में भारत ने निर्यात के मामले में अपनी पकड़ बनाये रखी है।" उन्होंने कहा कि आयात में गिरावट सोने, तेल और कोयले के आयात में कमी के कारण हुई है।

इस वर्ष नवंबर में अमेरिका को भारतीय वाणिज्यिक निर्यात पिछले साल की तुलना में 21 प्रतिशत से अधिक रहा। अक्टूबर में, अमेरिका को निर्यात सालाना आधार पर लगभग नौ प्रतिशत गिरकर 6.31 अरब डॉलर रह गया था जो गत वर्ष अक्टूबर में 6.91 अरब डॉलर था। अक्टूबर में अमेरिका को निर्यात में सितंबर की तुलना में सुधार दिखा था। सितंबर में अमेरिका को निर्यात गिरकर 5.47 अरब डॉलर पर आ गया था।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने भारत पर अगस्त में पहले 25 प्रतिशत और फिर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाकर उसे 50 प्रतिशत कर दिया था, जिससे सितंबर में वहां के बाजार में भारत का निर्यात तेजी से गिरा था। सरकार ने इकाइयों को अमेरिकी शुल्कों के नकारात्मगक प्रभाव से बचाने के लिए जीएसटी में कटौती और निर्यात प्रोत्साहन के अन्य उपाय किये हैं।

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