मुंबई , अप्रैल 07 -- भारतीय आवासीय रियल एस्टेट बाजार में इस कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही के दौरान निम्न मध्य वर्ग श्रेणी के मकानों की मांग में तेज गिरावट के चलते बाजार की रफ्तार में सुस्ती देखी गयी है, हालांकि मांग के मूल कारक मजबूत बने हुए हैं।
भू-सम्पत्ति बाजार परामर्श कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया की ताजा रिपोर्ट- इंडिया रियल एस्टेट - ऑफिस एंड रेजीडेंसियल (जनवरी-मार्च 2026) में पाया गया है कि इस साल जनवरी-मार्च तिमाही में 50 लाख रुपये से कम के और 50 लाख से एक करोड़ रुपये के बीच के मकानों की बिक्री में 23 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की तेज गिरावट है तथा इस खंड में खरीदारों को समर्थन दिये जाने की जरूरत है। बिक्री में गिरावट के बावजूद सम्पत्तियों का भाव तेज है। गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बाजार में कीमतों में वृद्धि ज्यादा दिखी है।
मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की पहली तिमाही के दौरान मकानों की बिक्री और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़कर 10,028 यूनिट हो गया है। बाजार यह संकेत दे रहा है कि 2023 की पहली तिमाही से ही घरों की बिक्री (आपूर्ति को खपाने की गति) की गति थोड़ी धीमी बनी हुई है।
तिमाही में प्राथमिक आवासीय इकाइयों की बिक्री सालाना आधार पर चार प्रतिशत घटकर 84,827 यूनिट रह गयी1 साल 2025 की पहली तिमाही में बिक्री 88,361 यूनिट थी।
मकानों के मुख्य बाजारों में से मुंबई में सालाना आधार पर सात प्रतिशत, दिल्ली-एनसीआर में 11 प्रतिशत और पुणे में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही में सामान्य मांग में इस गिरावट के बावजूद मांग का आधार मजबूत बना हुआ है।
मुंबई 23,185 यूनिट बिक्री के साथ सबसे बड़ा बाजार बना रहा। इसके बाद बेंगलुरु (13,092 यूनिट) और एनसीआर (12,734 यूनिट) का स्थान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार कुल मिलाकर गिरावट के माहौल में महंगे और लक्जरी बाजारों की मांग का रुझान मजबूत है। एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की मांग में 11 प्रतिशत की वृद्धि, एक से दो करोड़ रुपये के वर्ग के मकानों में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। यह खंड कुल बिक्री का 29 प्रतिशत रहा।
इसी तरह दो से पांच करोड़ रुपये के बीच के मकानों की बिक्री 17 प्रतिशत, 10-20 करोड़ रुपये के वर्ग में वृद्धि 12 प्रतिशत तथा 20-50 करोड़ रुपये के सीमित संख्या वाले खंड में 80 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गयी।
इसके विपरीत, वहीं किफायती मकानों के बाजार में गिरावट काफी अधिक रही। पचास लाख रुपये से कम के खंड में बिक्री में 23 प्रतिशत गिरावट दिखी, 50 लाख से एक करोड़ रुपये की श्रेणी के मकानों का बाजार 12 प्रतिशत गिरा।
रिपोर्ट के अनुसार कुल मांग में गिरावट के बावजूद पहली तिमाही में भी कीमतों में तेजी बनी हुई है। गाजियाबाद में दरों में 13 प्रतिशत और ग्रेटर नोएडा में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। मुंबई का बाजार सबसे मंहगा रहा जहां कीमतें 36,049 रुपये प्रति वर्ग फुट के स्तर पर थीं।
नाइट फ्रैंक इंडिया के प्रमुख शिशिर बैजल के अनुसार, इस वर्ष पहली तिमाही में मांग में आयी नरमी पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह कई वर्षों की तेजी के बाद आयी है। बढ़ती कीमतें और घटती बिक्री यह दर्शाती हैं कि लागत का दबाव बढ़ रहा है।
श्री बैजल ने यह भी कहा कि एक करोड़ रुपये से कम के वर्ग को बढ़ावा देना जरूरी है, क्योंकि यही बाजार की कुल मांग और लेन-देन को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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