मुंबई , दिसंबर 04 -- महाराष्ट्र में नासिक कुंभ मेले से पहले साधु ग्राम बनाने के लिए तपोवन में करीब 1,800 पेड़ काटे जाने पर विपक्षी पार्टियों, पर्यावरण समूहों और कार्यकर्ताओं ने पेड़ों की कटाई पर कड़ी आपत्ति जताई है।
दूसरी ओर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने एक भड़काऊ बयान दिया, जिसमें उन्होंने पूछा कि बकरीद के दौरान पर्यावरणविद चुप क्यों रहते हैं। उन्होंने पूछा, "जो लोग पेड़ों की चिंता करते हैं, वे बकरीद पर चुप क्यों रहते हैं? वे बकरियों को वैसे क्यों नहीं गले लगाते जैसे वे पेड़ों को गले लगाते हैं? जिससे गरमागरम बहस शुरू हो गई।
श्री राणे ने पर्यावरणविदों पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। उनके अनुसार पर्यावरणविद ईद के दौरान बकरे के वध का कभी विरोध नहीं करते। तब सर्वधर्म समभाव (सभी धर्मों की समानता) का सिद्धांत कहां गायब हो जाता है? अगर पेड़ों को रहना चाहिए, तो बकरियों को क्यों नहीं?"उन्होंने कहा, ''ईद के दौरान बड़े पैमाने पर कत्लेआम होता है और खून बहता है, फिर भी ये पर्यावरणविद कोई आवाज क्यों नहीं उठाते। वे कभी 'वर्चुअल बकरीद' मनाने की बात नहीं करते।" महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पेड़ काटने के फैसले पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले के दौरान आने वाले संतों और भक्तों के लिए पर्याप्त सुविधाएं देना जरूरी है लेकिन पर्यावरण की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि सबका ध्यान रखना होगा।
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