जोधपुर , जनवरी 11 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सरकारी और निजी स्कूलों को एक-दूसरे के पूरक बताते हुए कहा है कि पिछले दशकों में जो सरकारी और निजी स्कूलों के बीच 'सगे और सौतेले' बेटे जैसा अंतर पैदा हो गया था, हमारी सरकार उसे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है।

श्री शेखावत रविवार को यहां स्कूल शिक्षा परिवार के सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि डबल इंजन की सरकार निजी स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। निजी स्कूलों की आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से अटका हुआ आरटीई का पैसा वर्तमान सरकार के प्रयासों से मिलना शुरू हुआ है। बड़े ब्रांडेड स्कूलों की तुलना में छोटे स्कूलों के लिए समय पर भुगतान जीवन-मरण का प्रश्न है।

उन्होंने वादा किया कि वे केंद्र सरकार के स्तर पर भी आरटीई राशि के त्वरित हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए 'ब्रिज' का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पांचवीं बोर्ड की अंकतालिका के लिए 50 रुपए के शुल्क जैसी अतार्किक व्यवस्थाओं को बदलने के लिए सरकार कटिबद्ध है।

श्री शेखावत ने 'स्कूल शिक्षा परिवार' के साथ अपने जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मंच संघर्ष का नहीं बल्कि संवाद का है। उन्होंने मौजूद लोगों से आग्रह किया कि जिस तरह उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर विश्वास जताया, उसी तरह आने वाले पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर विकास की गति को बनाए रखें। पश्चिमी राजस्थान के सभी जिलों पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर से आए शिक्षाविदों का आभार व्यक्त करते हुए शेखावत ने कहा कि निजी स्कूलों के त्याग और समर्पण के बिना राजस्थान में साक्षरता दर में आया सुधार संभव नहीं था।

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