जयपुर , जनवरी 08 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में दाखिला देने संबंधी विवाद पर सरकार और निजी विद्यालयों की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पूर्व प्राथमिक से लेकर पहली कक्षा तक 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होंगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस पी शर्मा की खंडपीठ ने गुरुवार को यह महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि नर्सरी, केजी और पहली कक्षा दोनों में आरटीई के तहत प्रवेश अनिवार्य है।
उच्च न्यायालय ने फीस प्रतिपूर्ति को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पहले 2020 के अधिसूचना में केवल पहली कक्षा के आरटीई के तहत प्रवेश पर ही फीस की प्रतिपूर्ति तय की गई थी लेकिन न्यायालय ने इसे विस्तारित करते हुए कहा कि पूर्व प्राथमिक स्तर पर भी आरटीई सीटें भरने के लिए निर्देश स्पष्ट होने चाहिए। इससे सरकार के वह नियम कमजोर पड़े हैं जिनमें पूर्व प्राथमिक में फीस प्रतिपूर्ति नहीं दी जाती थी।
न्यायालय ने कहा कि आरटीई का उद्देश्य बच्चों को आरक्षित श्रेणियों से शिक्षा का समान अवसर देना है, इसलिए इसे कक्षाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता। सरकार और विद्यालयों की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया कि सभी स्कूल आरटीई के तहत निर्धारित 25 प्रतिशत सीटें भरें और फीस प्रतिपूर्ति के नियमों का सही तरीके से पालन करें।
न्यायालय ने कहा कि इस फैसले का मकसद गरीब एवं कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार प्रदान करना है और निजी विद्यालयों को कानून के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का पालन कराना है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित