लखनऊ , दिसंबर 15 -- बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर निजीकरण एवं विद्युत (संशोधन) बिल एवं परमार्ण ऊर्जा संशोधन विधेयक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी संयुक्त आंदोलन शुरू करेंगे। इस सिलसिले मेंं अगले साल 18 मार्च को दिल्ली मे एक विशाल रैली आयोजित किये जाने की योजना है।
इस मामले में बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियर्स की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई), केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच तथा संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के राष्ट्रीय नेतृत्व की बैठक रविवार को बीटी रणदीवे भवन में आयोजित हुई। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के चेयरमैन एवं संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि चर्चा का मुख्य फोकस बिजली के निजीकरण, प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग तथा ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) बिल, 2025 पर केंद्रित रहा। नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के एक साल से चल रहे प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
यह भी ध्यान में लाया गया कि सरकार संसद के वर्तमान सत्र में परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम में संशोधन बिल प्रस्तुत कर सकती है। बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष सर्वसम्मति से कई मांगें रखी गईं जिसमें ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) बिल, 2025 की तत्काल वापसी, परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की तत्काल वापसी, प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की स्थापना को तत्काल रोकना,उत्पादन, पारेषण तथा वितरण में मौजूदा सभी निजीकरण या फ्रैंचाइजी मॉडलों की वापसी आदि शामिल है।
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