लखनऊ , दिसंबर 07 -- पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने जनवरी से प्रदेशव्यापी व्यापक आंदोलन का ऐलान किया है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण केवल उपभोक्ताओं की समस्याएँ बढ़ाएगा और बिजली कर्मियों के हितों का हनन करेगा। साथ ही, आंदोलन के चलते की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।

समिति की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को लखनऊ में आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के सभी जनपदों के संयोजक, सह-संयोजक तथा विभिन्न श्रम संघों एवं सेवा संगठनों के केंद्रीय पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में आंदोलन को गति देने और आगामी रणनीति पर सहमति बनी।

समिति ने निर्णय लिया है कि आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर एक जनवरी को पूरे प्रदेश में बिजली कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे, साथ ही कार्यालय समय के उपरांत समूहों में प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 01 से 08 जनवरी तक ड्यूटी के दौरान काली पट्टियाँ बाँधकर शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। 08 जनवरी को प्रदेश के सभी डिस्कॉम मुख्यालयों एवं परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जायेंगे।

यही नहीं, 08 जनवरी से 22 जनवरी तक बिजली कर्मी कार्यालय समय के उपरांत बिजली आपूर्ति के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे-यानी मीटरिंग, बिलिंग और वसूली जैसे कार्य ठप रहेंगे। आंदोलन के अगले चरण का ऐलान 22 जनवरी को लखनऊ में आयोजित होने वाली विशाल रैली के दौरान किया जाएगा, जिसमें बिजली कर्मचारी, संविदाकर्मी और अभियंता भारी संख्या में शामिल होंगे।

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