कानपुर , अप्रैल 17 -- नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में शुक्रवार को कानपुर की महिलाओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसे महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।

वक्ताओं ने कहा कि यह पहल देश के लोकतंत्र को नई दिशा देने के साथ आधी आबादी की भागीदारी को और मजबूत करेगी।

अधिवक्ता एवं महिला अधिकारों के लिए कार्य करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता दिशा अरोड़ा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी को दूर करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं में क्षमता हमेशा से रही है, लेकिन अवसर और भागीदारी सीमित थी। 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ अब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मजबूती से गूंजेगी और वे नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी शिवहरे ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और बदलती भूमिका का प्रतीक है। पहले महिलाएं मतदान तक सीमित थीं, लेकिन अब नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आधी आबादी से जुड़े मुद्दे मजबूती से सामने आएंगे और उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में "प्रधान पति" जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन व्यवस्था तेजी से बदल रही है और महिलाएं वास्तविक नेतृत्व की ओर बढ़ रही हैं।

एसएन सेन डिग्री कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि इस अधिनियम से महिलाएं स्वयं को अधिक सशक्त महसूस करेंगी और अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकेंगी। उन्होंने कहा कि छात्राओं में भी इस विषय को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और उनके विचारों को महत्व दिया जा रहा है।

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