कानपुर , दिसंबर 07 -- मातृशक्ति में निहित सात मूल शक्तियों कीर्ति, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति, क्षमा और श्री को जागृत कर समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के मकसद से सरस्वती शिशु मंदिर गोविन्द नगर में रविवार को सप्त शक्ति संगम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर सप्तशक्ति क्षेत्र संयोजिका निधि द्विवेदी ने कहा कि मातृ शक्ति परिवार की आधारशिला के साथ ही संस्कार, शिक्षा और सामाजिक दिशा प्रदान करने वाली चेतना शक्ति है। सप्त शक्ति का उद्देश्य महिलाओं के भीतर आत्मगौरव और कर्तव्य बोध को जागरूक कर पंच परिवर्तन जिसमें स्व-बोध, पारिवारिक प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य जैसे मूल बिंदु शामिल हैं, उसके विचारों को परिवार से समाज तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि जब परिवार संस्कारवान और जागरूक होता है, तब समाज के प्रत्येक स्तर पर समरसता और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

श्रीमती द्विवेदी ने कहा कि डिजिटल युग की चुनौतियों में माताओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों में मूल्य आधारित शिक्षा, सामाजिक दिशा, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्य के संस्कार मातृ शक्ति ही प्रदान कर सकती है। यही पंच परिवर्तन की मूल भावना भी है।

प्रधानाचार्य नेहा शुक्ला ने कार्यक्रम के अंत में सभी मातृ शक्तियों को सप्त शक्ति जागरण और पंच परिवर्तन के मूल सिद्धांतों को अपने परिवार और समाज में लागू करने का संकल्प दिलाया, और सभी उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सप्त शक्ति संगम और पंच परिवर्तन का समन्वय नई पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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