वारसा , जनवरी 07 -- पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच बढ़ते विवाद के बीच चेतावनी दी है कि यदि नाटो के सदस्य देश एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होते हैं तो यह सैन्य गठबंधन "अपना अर्थ खो देगा।"श्री टस्क ने इस दौरान डेनमार्क के प्रति अपना समर्थन ज़ाहिर किया। उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "नाटो के किसी भी सदस्य को दूसरे सदस्य को धमकी नहीं देनी चाहिए और न ही उस पर हमला करना चाहिए। यदि गठबंधन के भीतर ही टकराव शुरू हो गया, तो नाटो का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।"उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन सहित कई यूरोपीय नाटो देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता का समर्थन किया है। बयान में कहा गया, "ग्रीनलैंड उसके लोगों का है और डेनमार्क व ग्रीनलैंड से जुड़े फैसले लेने का अधिकार केवल उन्हीं को है।"अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव पिछले सप्ताह उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने यह कहा कि अमेरिका को रणनीतिक कारणों से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है और उसे हासिल करने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, यहां तक कि सैन्य विकल्प पर भी। इन बयानों ने डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों में गंभीर चिंता पैदा कर दी।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने श्री ट्रंप के बयानों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यदि अमेरिका किसी नाटो सहयोगी पर सैन्य हमला करता है, तो नाटो का अस्तित्व ही निरर्थक हो जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क की नाटो सदस्यता और सामूहिक रक्षा व्यवस्था के अंतर्गत आता है।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी किसी प्रकार के नियंत्रण हस्तांतरण की मांग को खारिज करते हुए इसे 'अपमानजनक' और 'अस्वीकार्य' करार दिया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड "महाशक्तियों की बयानबाज़ी का विषय नहीं" है और इस तरह के "विलय के भ्रम" को समाप्त किया जाना चाहिए।

यूरोपीय सरकारें एक ओर डेनमार्क की संप्रभुता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर नाटो और व्यापक सुरक्षा सहयोग के लिए आवश्यक ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को बनाए रखने की अपील भी कर रही हैं।

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