नयी दिल्ली , मार्च 31 -- जैव विविधता संरक्षण और संसाधनों के निष्पक्ष उपयोग की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए नागोया अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र जारी करने में भारत दुनिया का अग्रणी देश बन गया है।
आधिकारिक सूचना के अनुसार, दुनिया भर में जारी कुल प्रमाणपत्रों में से 56 प्रतिशत से अधिक प्रमाणपत्र भारत ने जारी किए हैं, जिससे भारत इस क्षेत्र में अन्य सभी देशों से काफी आगे निकल गया है।
एक्सेस एंड बेनिफिट- शेयरिंग-एबीएस क्लियरिंग- हाउस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ज 6,311 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं जिनमें से भारत ने 3,561 प्रमाण पत्र जारी किए हैं। सूची में भारत के बाद फ्रांस दूसरे स्थान पर है, जबकि स्पेन, अर्जेंटीना, पनामा और केन्या जैसे देश इससे काफी पीछे हैं। यह उपलब्धि जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के पारदर्शी एवं न्यायसंगत उपयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
नागोया प्रोटोकॉल के प्रावधानों के अनुसार, आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच प्रदान करने वाले देशों के लिए यह प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य है। प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि करता है कि संसाधनों के उपयोग के लिए पूर्व सूचित सहमति ली गई है और उपयोगकर्ता तथा प्रदाता के बीच पारस्परिक रूप से सहमत शर्तें तय की गई हैं।
भारत की यह सफलता उसके सुदृढ़ कानूनी और संस्थागत ढांचे का परिणाम है, जिसे जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत लागू किया गया है।
यह उपलब्धि न केवल वैश्विक जैव विविधता प्रबंधन में भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश जैविक संसाधनों से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत और समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
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