दीमापुर , अक्टूबर 23 -- नागालैंड नागा छात्र संघ (एनएसएफ) ने 20 अक्टूबर को मोन जिले के अंतर्गत खम्मोई गांव में हुए ड्रोन हमले की निंदा की, जो कथित रूप से भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किया गया था, जिसके कारण दो लोगों की मौत हो गई और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।

एनएसएफ ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से एक स्वतंत्र, अंतर्राष्ट्रीय जांच शुरू करने तथा मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय से सशस्त्र बल विशिष्ट शक्ति (विशेष शक्तियां) अधिनियम के अंतर्गत होने वाले उल्लंघनों पर वास्तविक स्थिति रिपोर्ट जारी करने का आह्वान किया।

एनएसएफ के अनुसार, इस तरह की कार्रवाइयां अफस्पा जैसे घरेलू कानून की आड़ में सैन्य दमन, हथियारबंद भय और प्रणालीगत दंडमुक्ति के परेशान करने वाली निरंतरता को दर्शाती हैं।

एनएसएफ ने एक विज्ञप्ति में कहा कि पीड़ितों में एक होनहार युवा छात्र नेता, खम्मोई छात्र संघ के संयुक्त सचिव, खम्पेई वांगसा और एक आठ वर्षीय बच्चा, फिफोट वांगसू, जो खम्मोई मिशन स्कूल का होनहार छात्र शामिल हैं।

इसमें कहा गया कि उनकी जिंदगी अचानक एक ऐसे वारदात में समाप्त कर दी गई जो मानवता के हर मानक को चुनौती देता है।

यह कहते हुए कि अफस्पा बल प्रयोग के विरुद्ध कानूनी प्रतिरक्षा प्रदान करता है तथा एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है जहां जवाबदेही वैकल्पिक हो जाती है। एनएसएफ ने नागा मातृभूमि से इस अधिनियम को तत्काल और बिना शर्त निरस्त करने की अपनी मांग दोहराई।

इसके अलावा, सैन्यीकरण और राज्य प्रायोजित हिंसा के खिलाफ अपने निरंतर विरोध में, एनएसएफ ने अपनी सभी संघीय इकाइयों और अधीनस्थ निकायों में सशस्त्र बलों के साथ असहयोग की पुष्टि की, जब तक कि अफस्पा को निरस्त नहीं किया जाता।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित