दीमापुर , जनवरी 15 -- नागालैंड के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में राज्य की मूल गोवंशीय नस्ल 'नागामी मिथुन' को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आधिकारिक तौर पर पंजीकृत कर लिया गया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएम), नागालैंड के वैज्ञानिकों की टीम को इस नस्ल का आधिकारिक पंजीकरण प्रमाण-पत्र सौंपा है। इस नस्ल को एक खास एक्सेसिबिलिटी नंबर के साथ मान्यता दी गई है। नागामी मिथुन को डॉ. हर्षित कुमार और डॉ. गिरीश पाटिल एस. के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम के आवेदन किए जाने के बाद पंजीकृत किया गया।

नागामी मिथुन मुख्य रूप से नागालैंड के कोहिमा, पेरेन, चुमौकेदिमा, जुन्हेबोटो, फेक और वोखा सहित लगभग सभी प्रमुख जिलों में पाया जाता है। शारीरिक रूप से यह नस्ल काफी मजबूत और मांसल होती है, जिसका रंग आमतौर पर काला होता है और इसके पैरों पर सफेद रंग के विशिष्ट निशान होते हैं। पारंपरिक रूप से इस नस्ल का पालन मुख्य रूप से मांस उत्पादन और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक समारोहों के उद्देश्य से किया जाता है, जो इसे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा बनाता है।

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