भदोही , मार्च 21 -- बासंतिक नवरात्र के दौरान वरुणा और बसुही नदियों के संगम पर स्थित मां भगवती भद्रकाली धाम के आसपास का श्मशान क्षेत्र तांत्रिक गतिविधियों के चलते रात में असहज और रहस्यमय माहौल में डूब जाता है।
वाराणसी जिले के सरावां गांव स्थित यह धाम कंटीली झाड़ियों और जंगली इलाके से घिरा हुआ है, जहां पहुंचना कठिन माना जाता है। मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित वरुणा-बसुही संगम स्थल के आसपास घना जंगल, सरपत के झुरमुट और सुनसान वातावरण नवरात्र की रातों में और भी भयावह हो जाता है।
अंधेरी रातों में श्मशान के आसपास तंत्र-मंत्र की गुप्त साधनाएं की जाती हैं, जिससे स्थानीय लोग असहज महसूस करते हैं। ये साधनाएं आमतौर पर एकांत स्थानों या श्मशान घाटों पर आधी रात के समय गुप्त रूप से की जाती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक शास्त्री के अनुसार, नवरात्र में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं से जुड़ी तांत्रिक साधनाएं विशेष रूप से की जाती हैं। इनका उद्देश्य शत्रु नाश, आर्थिक उन्नति, वाक् सिद्धि और मनोकामना पूर्ति होता है। साधक इन अनुष्ठानों के दौरान लौंग और बताशा माता को अर्पित करते हैं, जिसे सरल और उत्तम भोग माना जाता है।
उन्होंने बताया कि वरुणा-बसुही संगम स्थल पौराणिक दृष्टि से काशी के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में रहा है और प्राचीन काल में तांत्रिक साधनाओं का महत्वपूर्ण स्थल माना जाता था।
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