नयी दिल्ली , नवंबर 17 -- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की उप सचिव (नर्सिंग एवं दंत चिकित्सा) आकांक्षा रंजन ने सोमवार को कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। उन्होंने अधिक लचीले और योग्यता-आधारित नर्सिंग कार्यबल के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

सुश्री रंजन ने यह बात यहां 'भारत और ऑस्ट्रेलिया में नर्सिंग कार्यबल को मजबूत बनाने : सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप कुशल नर्सिंग कार्यबल के लिए सहयोगात्मक मार्ग का निर्माण' विषय पर आयोजित दो दिवसीय गोलमेज सम्मेलन के पहले दिन कही। इस सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, एडिथ कोवान विश्वविद्यालय (ईसीयू), ऑस्ट्रेलिया और जॉन्स हॉपकिन्स प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल एजुकेशन इन गायनोकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स (जेएचपीइजीओ) के सहयोग से किया गया। इस सम्मेलन का लक्ष्य गहन सहयोग को बढ़ावा देना, सर्वोत्तम प्रणालियों को साझा करना और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक लचीले भविष्य के लिए तैयार नर्सिंग कार्यबल के निर्माण के लिए संयुक्त मार्ग विकसित करना है।

इस अवसर पर सुश्री रंजन कहा कि यह गोलमेज सम्मेलन तीन दिवसीय राष्ट्रीय रणनीतिक बैठक के ठीक बाद होना महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में भारत में नर्सिंग नीति की भविष्य की दिशा पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि विश्वभर में 2.9 मिलियन नर्सें कार्यरत हैं, जबकि उनकी कमी 4.5 मिलियन है। उन्होंने कहा कि यह मंच भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग से नर्सिंग शिक्षा मानकों को आगे बढ़ाने, कार्यबल के मार्गों का विस्तार और गतिशीलता देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।

सुश्री रंजन ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों को उभरती स्वास्थ्य प्रणाली चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने में मदद कर सकता है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की नर्सिंग सलाहकार डॉ. दीपिका खाखा ने कहा कि नर्सें वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की धड़कन बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि गोलमेज सम्मेलन का मूल उद्देश्य पारस्परिक शिक्षा के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया भविष्य की स्वास्थ्य सेवा चुनौतियों का संयुक्त रूप से अनुमान लगाना और उनका समाधान करना है।

श्रीमति खाखा ने नर्सिंग स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में प्रगति पर कहा कि भारत का 35 लाख कर्मचारियों वाला नर्सिंग कार्यबल तेज़ी से विकसित हो रहे स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में अपनी सेवाएं दे रहा है, जिसे 5,000 से ज़्यादा नर्सिंग संस्थानों के एक मज़बूत इको-सिस्टम का समर्थन प्राप्त है, जो विभिन्न नर्सिंग कार्यक्रम प्रदान करते हैं। भारत सरकार स्वास्थ्य कार्यबल में महत्वपूर्ण निवेश कर रही है, जिसमें भविष्य में 157 नए नर्सिंग संस्थानों की स्थापना भी शामिल है।

इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के एडिथ कोवान विश्वविद्यालय की कार्यकारी डीन, प्रो. करेन स्ट्रिकलैंड ने नर्सिंग शिक्षा और अभ्यास को आगे बढ़ाने में दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।

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