इंदौर , मार्च 29 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माँ नर्मदा प्रदेश की जीवन रेखा हैं और उनके आशीर्वाद से राज्य में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजनाओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई गति मिली है, जिससे प्रदेश में कृषि, उद्योग और पेयजल की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में नर्मदा जल के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 1356 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल आपूर्ति संबंधी विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। साथ ही रामसर साइट सिरपुर में 62.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण भी किया।
उन्होंने बताया कि संकल्प से समाधान अभियान के तहत इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है तथा एक लाख 44 हजार 912 आवेदनों का निराकरण किया गया। यह अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में संचालित हुआ। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बड़े पैमाने पर कुएं, बावड़ी, तालाब और नहरों का निर्माण एवं पुनर्जीवन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के 25 जिलों को लाभ मिलेगा, जबकि पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों में सिंचाई और पेयजल सुविधाएं सुदृढ़ होंगी। उन्होंने शिप्रा नदी के पुनर्जीवन के लिए भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि इंदौर शहर की आगामी 25 वर्षों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाई गई है, जिससे पेयजल समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। इंदौर-उज्जैन महानगरीय क्षेत्र को देश के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह क्षेत्र देश का प्रमुख महानगरीय क्षेत्र बनेगा।
नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे इंदौर के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि वर्ष 2040 तक की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की तैयारी की जा रही है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि इस योजना से लगभग 900 एमएलडी जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि वर्तमान में इंदौर को लगभग 450 एमएलडी पानी मिल रहा है, जो चौथे चरण के पूर्ण होने पर वर्ष 2029 तक बढ़कर 900 एमएलडी हो जाएगा, जिससे करीब 65 लाख नागरिकों को लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया।
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