लखनऊ , नवम्बर 19 -- बुलंदशहर उत्तर प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहाँ एक ही संस्था नरौरा परमाणु एटॉमिक पावर प्लांट ने जनपद के सभी टीबी (क्षय) मरीजों को गोद लेकर पोषण सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है।
इस महत्वपूर्ण सहयोग के लिए बुधवार को नरौरा पावर प्लांट और स्वास्थ्य विभाग के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्रुति तथा प्रमुख स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यदि अन्य संस्थान भी इसी तरह आगे आएं, तो प्रदेश के प्रत्येक टीबी मरीज तक आवश्यक पोषण और देखभाल पहुंचाना संभव होगा। उन्होंने कहा कि अच्छा पोषण टीबी से उबरने की प्रक्रिया को तेज करता है और मृत्यु दर को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। सात दिसंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 के बीच 2.45 करोड़ जोखिमग्रस्त आबादी की स्क्रीनिंग करने के साथ ही 67.41 लाख व्यक्तियों का एक्स-रे परीक्षण किया गया। जबकि 5.45 लाख मरीजों की पहचान कर उपचार शुरू किया गया और 22 लाख नेट परीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि 3.99 लाख मरीजों को पोषण पोटली करने के साथ ही 2 लाख मरीजों का डिफरेंशिएटेड टीबी केयर मूल्यांकन किया गया।
जिलाधिकारी श्रुति की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे, नरौरा परमाणु पावर प्लांट के निदेशक महेश प्रसाद राठ और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हेमंत रस्तोगी के मध्य एमओयू पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं पाँच क्षय रोगियों को गोद लेकर उन्हें पोषण सामग्री वितरित की।
गौरतलब है कि वर्तमान में बुलंदशहर जिले में 7,953 टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है। नरौरा पावर प्लांट द्वारा सभी मरीजों के पोषण की जिम्मेदारी लेना टीबी उन्मूलन अभियान को प्रदेश में नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।
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