पटना, शुक्रवार (वार्ता) पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने शुक्रवार को कहा कि नव वर्ष के पहले छह महीने में सरकार का लक्ष्य है कि पटना के 500 मूक-बधिर बच्चों का कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के माध्यम से किया जाये, जिससे उनकी सुनने और बोलने की क्षमता वापस लौट आए।

जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में प्रति 1,000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजन के अधिकारों, गरिमापूर्ण जीवन एवं समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ त्यागराजन ने चिकित्सा पदाधिकारियों एवं अन्य को एक प्रशिक्षण कार्यशाला में संबोधित करते हुए कहा कि पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना है। इसके लिए स्वास्थ्य, आईसीडीएस, जीविका, पंचायती राज, समाज कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कल्याण, सिविल सोसायटी, माता-पिता, अभिभावकगण सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए कम उम्र में ही ऐसे बच्चों की पहचान जरूरी है। जागरूकता की कमी के कारण बहुत से बच्चों की समुचित स्क्रीनिंग नही हो पाती है।इस स्थिति इसमें सुधार लाने की आवश्यकता है।

जिलाधिकारी ने कहा कि पटना जिले में जुलाई से नवम्बर, 2025 के बीच 66,434 बच्चों की कान से जुड़ी/श्रवण समस्या की जाँच की गई। इसमें 160 बच्चों में कान से जुड़ी समस्या पायी गई। इन सभी बच्चों की जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच की गई। उन्होंने कहा कि ओएई प्रतिवेदन के आधार पर 56 बच्चे कोक्लियर इम्प्लांट के लिए चिन्हित किए गए। इनमें से 45 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट के लिए कानपुर भेजा गया है तथा 32 बच्चों की सफलतापूर्वक कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी पूरी कर ली गई है।

डॉ त्यागराजन ने कहा कि उपचार एवं सर्जरी के साथ नियमित स्पीच थेरैपी तथा माता-पिता एवं अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी काफी आवश्यक है। जल्दी जाँच, सही इलाज एवं थेरैपी से बच्चा सामान्य बच्चों की तरह बोल सकता है।

आज के कार्यक्रम में श्रवण श्रुति योजना के अन्तर्गत आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में पटना जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका, आशा फैसिलिटेटर, आशा कार्यकर्त्ता, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के समन्वयक-प्रबंधक एवं अन्य भी उपस्थित थे। इस दौरान स्व. एस.एन. मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउण्डेशन, कानपुर के प्रो. डॉ. रोहित मेहरोत्रा, एम.एस. ईएनटी द्वारा सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के संबंध में वृहद प्रशिक्षण भी दिया।

कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने जिले के सिविल सर्जन को मूक-बधिर बच्चों की कम उम्र में पहचान तथा जाँच की गति बढ़ाने के लिए सभी चिकित्सा केन्द्रों को लक्ष्य निर्धारित करने का निर्देश भी दिया।

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