शिमला/नयी दिल्ली , फरवरी 11 -- श्रम मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त बारह प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयूएस) ने केंद्र सरकार की कथित कॉर्पोरेट-समर्थक और श्रमिक-विरोधी नीतियों के खिलाफ गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
इन यूनियनों में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ-एम्प्लॉयड वुमेन्स एसोसिएशन (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) और नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस-धनबाद (एनएफआईटीयू-डीएचएन) शामिल हैं। इनमें सदस्य संख्या और प्रभाव के मामले में बीएमएस और इंटक को सबसे बड़ा माना जाता है।
सीटू के पूर्व सचिव जगत राम ने कहा कि हड़ताल का आह्वान कानूनों को नयी श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रम सुरक्षा को कमजोर करने के विरोध में किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नीतियां कॉर्पोरेट हितों का पक्ष लेती हैं और श्रमिकों की सौदेबाजी की शक्ति को कम करती हैं।
श्री राम के अनुसार, वामपंथी, मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़ी ट्रेड यूनियनें इस हड़ताल में भाग लेंगी। इसके साथ ही किसान संगठन, फोरलेन संघर्ष समिति और बिजली, बैंकिंग, होटल, रेल तथा औद्योगिक क्षेत्रों के कर्मचारी भी इसमें शामिल होंगे।
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