नयी दिल्ली , जनवरी 03 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि उनकी सेना वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठाकर अमेरिका ले आयी है तो यह महज फौरी तौर पर लिया गया फैसला भर नहीं है। इसकी जड़ में इन दोनों देशों के रिश्तों में ढाई दशक से चली आ रही कड़वाहट और वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका के प्रभुत्व कायम करने की लालसा है।
दरअसल, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच अविश्वास और तनाव की जड़ें तब से हैं, जब 1999 में वहां वामपंथी राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने सत्ता संभाली। वहीं यह भी एक तथ्य है कि वेनेजुएला को सबसे पहले स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता भी अमेरिका ने ही 1835 में दी थी।
यहां वेनेजुएला और अमेरिका के बीच बिगड़ते रिश्तों की टाइमलाइन दी गयी है कि और कैसे इस दक्षिण अमेरिकी देश और अमेरिका के रवैये ने इस स्थिति को जन्म दिया है।
* 1999 : ह्यूगो शावेज ने सत्ता में आने के बाद 'बोलिवेरियन क्रांति' शुरू की और अमेरिका को 'साम्राज्यवादी' बताया।
* 2002 : वेनेजुएला ने अमेरिका पर शावेज के खिलाफ विफल सैन्य तख्तापलट का समर्थन करने का आरोप लगाया।
* 2007 : शावेज ने तेल क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण किया, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ।
* 2013 : मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद आर्थिक बदहाली और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कई प्रतिबंध लगाये।
* 2019 : अमेरिका ने मादुरो के पुनर्चुनाव को अवैध घोषित कर विपक्षी नेता जुआन गुआइडो को 'अंतरिम राष्ट्रपति' के रूप में मान्यता दी।
* 2025 : अमेरिका ने नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के नाम पर कैरिबियन क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती की।
* 2025 : अमेरिकी विदेश विभाग ने 2019 में श्री मादुरो पर डेढ़ करोड़ डॉलर (करीब 135 करोड़ रुपये) का इनाम रखा था। इनाम की राशि अगस्त 2025 में बढ़ाकर पांच करोड़ डॉलर (करीब 450 करोड़ रुपये ) कर दी थी।
* 2026 : अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए।
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