नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- नयी दिल्ली के लोधी एस्टेट स्थित एलायंस फ्रासेज में बुधवार को 12वें शिल्प महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट (आईटीआरएचडी) द्वारा आयोजित इस महोत्सव में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कारीगर हिस्सा ले रहे हैं।
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के कारीगरों को एक मंच प्रदान है ताकि कारीगरों एवं खरीदारों के बीच बिना किसी बिचौलिए के सीधा संवाद एवं बिक्री संभव हो सके। प्रदर्शनी 10 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक खुली रहेगी और प्रवेश निःशुल्क है।
इस महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शोवना नारायण ने किया। उन्होंने भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं के संरक्षण की सांस्कृतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। कार्यक्रम में आईटीआरएचडी के चेयरमैन श्री एस. के. मिश्रा भी उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए श्री एस. के. मिश्रा ने कहा, "आईटीआरएचडी का उद्देश्य केवल शिल्प प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास कारीगरों की पहुंच नए बाज़ारों तक बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।"वहीं शोवना नारायण ने कहा, "भारतीय शिल्प संग्रहालयों में सजे निष्क्रिय अवशेष नहीं हैं बल्कि परिवारों, स्मृतियों और रोज़मर्रा की साधना से जीवित रहने वाली परंपराएं हैं। इस तरह के मंच यह सुनिश्चित करते हैं कि कारीगर गुमनामी में न चले जाएं और उनके श्रम व विरासत की गरिमा बनी रहे।"इस वर्ष महोत्सव का एक प्रमुख केंद्र पश्चिमी राजस्थान का बाड़मेर ज़िला है, जो भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित है। इस क्षेत्र से छह कारीगर भाग ले रहे हैं, जो कढ़ाई, एप्लीक कार्य, चर्म शिल्प, धुर्री बुनाई और अजरख वस्त्र मुद्रण जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
भाग लेने वाले कारीगर लाइव डेमो के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे शहरी दर्शकों को उन शिल्प परंपराओं की झलक मिलती है, जो भौगोलिक रूप से अलग-थलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं और जहां बाज़ार तक पहुंच सीमित है। आयोजकों के अनुसार, यह उत्सव कारीगरों को स्वतंत्र आय अर्जित करने और खरीदारों के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाने में मदद करता है।
आईटीआरएचडी ने बताया कि वह पिछले छह से सात वर्षों से बाड़मेर के कारीगरों के साथ लगातार काम कर रहा है और हर वर्ष नए प्रतिभागियों को जोड़कर अपना दायरा बढ़ा रहा है। प्रदर्शनी के अलावा, ट्रस्ट डिज़ाइन हस्तक्षेप, उत्पाद विविधीकरण और विभिन्न मंचों तक पहुंच पर भी काम करता है, साथ ही भागीदारी से जुड़े खर्च स्वयं वहन करता है ताकि बिक्री की पूरी राशि कारीगरों को ही प्राप्त हो।
उत्तर प्रदेश से इस आयोजन में आज़मगढ़ ज़िले के तीन गांवों के कारीगर शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक एक अलग सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वाराणसी से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित मुबारकपुर कुशल हथकरघा बुनकरों के लिए जाना जाता है, जिनका काम बनारसी साड़ी परंपरा से गहराई से जुड़ा है। निकटता के बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय तक अपेक्षाकृत उपेक्षित रहा है। महोत्सव का उद्देश्य प्रत्यक्ष बिक्री और व्यापक प्रदर्शन के माध्यम से मुबारकपुर को एक स्वतंत्र बुनकर केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
एक अन्य प्रमुख आकर्षण निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी है, जो पिछले एक दशक में शिल्प पुनरुद्धार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है। जून 2022 में जर्मनी में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा को निज़ामाबाद ब्लैक पॉटरी भेंट किए जाने के बाद इस शिल्प को वैश्विक पहचान मिली। प्रदर्शनी में प्रदर्शित कई कलाकृतियां उसी मूल कारीगर परिवार से जुड़े सदस्यों द्वारा बनाई गई हैं, जो इस कला के पुनर्जीवन से जुड़े रहे हैं।
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