नैनीताल , मार्च 31 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश की नदियों में सिल्ट (गाद) हटाने के मामले में पूर्व आदेशों का अनुपालन न होने पर खंडपीठ ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अभी तक की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट शपथपत्र के माध्यम से दो सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करें।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि तय की है।
याचिकाकर्ता दिनेश चंदोला और अन्य ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि नंधौर नदी समेत गौला, कोसी, गंगा और दाबका नदियों में भारी मात्रा में सिल्ट जमा होने से जल प्रवाह बाधित हो रहा है। इससे नदियों का चैनलाइजेशन नहीं हो पा रहा और आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव व भू-कटाव की समस्या लगातार बढ़ रही है।
आगे कहा गया कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों के बावजूद अभी तक सिल्ट हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई जबकि 15 जून से मानसून सत्र शुरू होने वाला है और अप्रैल माह भी प्रारंभ हो चुका है, ऐसे में समय रहते कार्यवाही न होने पर आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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