सुकमा , अप्रैल 07 -- छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित रहे सुकमा जिले के दूरस्थ गांवों में परिवहन सुविधाओं के विस्तार के बाद आवागमन की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कोंटा विकासखंड के लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण अब दोरनापाल जैसे प्रमुख केंद्रों तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं।
जिला पीआरओ से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार, पहले दुर्गम रास्तों और सुरक्षा कारणों से इन क्षेत्रों के लोग लंबे समय तक सीमित दायरे में रहने को मजबूर थे, लेकिन अब स्थिति में बदलाव दिखाई दे रहा है। बस सेवा शुरू होने से पहले ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए आठ से दस किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। कई बार समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिलने से जरूरी कार्य प्रभावित होते थे। अब नियमित बस संचालन के कारण लोगों को समय की बचत हो रही है और दैनिक कार्यों का निष्पादन आसान हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पहले बस पकड़ने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था और कई बार बस छूट जाने से पूरा दिन प्रभावित हो जाता था।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत संचालित बसें पोलमपल्ली, कांकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार, लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे क्षेत्रों से होकर गुजर रही हैं। इससे ग्रामीणों को दोरनापाल तक पहुंचने और वापस लौटने में सुविधा मिल रही है।
इस व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों और श्रमिकों को लाभ मिल रहा है।
क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद अब लोग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों के लिए गांव से बाहर आ-जा पा रहे हैं। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में भी गति आने की संभावना जताई जा रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार योजना के तहत दूरस्थ क्षेत्रों में दस बसों का संचालन किया जा रहा है, जबकि पांच अतिरिक्त बसें अन्य मार्गों पर चलाई जा रही हैं। बस संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए शासन द्वारा अनुदान और कर में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
परिवहन सुविधा के विस्तार को ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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