सुकमा , नवंबर 07 -- छत्तीसगढ़ में सुकमा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने उन शिक्षा दूतों के परिवारों को सरकारी नौकरी और मुआवजा देने की मांग की है, जिन्होंने नक्सल हिंसा में अपने परिजन खोए हैं।

श्री कवासी ने ज्ञापन जिला कलेक्टर सुकमा को सौंपा। राज्य में नक्सल प्रभावित इलाकों में जान जोखिम में डालकर बच्चों को शिक्षा की रोशनी देने वाले शिक्षा दूतों के सम्मान और न्याय की मांग को लेकर सुकमा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है।

श्री कवासी ने बताया कि ये शिक्षा दूत उस दौर में भी गांवों में पढ़ाई की अलख जगाए रखे, जब गोलियों की आवाजें आम बात थीं। कई स्कूल जो वर्षों से बंद थे, उन्हें फिर से शुरू कराने में शिक्षा दूतों की अहम भूमिका रही। उन्होंने कठिन परिस्थितियों, मानदेय न मिलने और लगातार नक्सलियों के खौफ के बावजूद बच्चों को पढ़ाना जारी रखा। कई शिक्षा दूतों ने अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए नक्सली हिंसा में जान गंवाई, फिर भी यह वर्ग आज भी दूरस्थ गांवों में शिक्षा की ज्योति जलाए हुए है।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे शिक्षा दूतों को केवल संविदा कर्मी नहीं, बल्कि समाज के "शहीद शिक्षक" के रूप में सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शासन को दिवंगत शिक्षा दूतों के नाम पर स्कूलों या शैक्षणिक संस्थाओं का नामकरण करना चाहिए, ताकि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे सके।

श्री कवासी ने कहा कि आज भी कई शिक्षा दूतों के परिवार सरकारी सहायता या रोजगार से वंचित हैं। इससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिले में ऐसे परिवारों की पहचान कर उन्हें सम्मानजनक मुआवजा, सरकारी नौकरी में प्राथमिकता और सभी आवश्यक राहत तत्काल दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जब नई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया चल रही है, तब शिक्षा दूतों को इसमें प्राथमिकता और विशेष छूट दी जानी चाहिए। यह न केवल उनके योगदान का सम्मान होगा बल्कि नक्सल क्षेत्रों में शिक्षा को और मजबूती भी देगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित