कांकेर, 05 फरवरी 2026 (वार्ता) वे हाथ जिन्होंने कभी बंदूकें थामकर हिंसा का रास्ता चुना था, आज वही हाथ गाड़ियों के स्टीयरिंग सम्भाल रहे हैं, सिलाई मशीन चला रहे हैं और लकड़ी को नया आकार दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा में लौटाकर उनके जीवन को नयी दिशा देने का अभियान जोरों पर है। इसी कड़ी में कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड स्थित चौगेल (मुल्ला) कैंप 'कौशलगढ़' बन गया है, जहां 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।

कांकेर के जिला जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने गुरुवार को प्रशिक्षण केंद्र से जुड़ी जानकारियों के बारे में बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की 'आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025' के अंतर्गत चलाए जा रहे इस पुनर्वास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाना है। कैंप में ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प और सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, शिक्षा के प्रति रुचि रखने वाले प्रशिक्षणार्थियों को प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा भी दी जा रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित