रायपुर, जनवरी 03 -- छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शनिवार को नक्सली कमांडर बारसे देवा के समर्पण को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता थी कि नक्सली आत्मसमर्पण के बाद छत्तीसगढ़ में ही पुनर्वास हो हालांकि यदि तेलंगाना में यह प्रक्रिया पूरी हो रही है तो वह भी स्वीकार्य है। लगातार प्रशासनिक एवं रणनीतिक दबाव के कारण उसका मन परिवर्तन हुआ है और वह औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया मार्च 2026 तक नक्सलवाद के उन्मूलन के लक्ष्य के अनुरूप है। देश से नक्सलवाद जैसे नासूर को समाप्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों और सरकार के प्रयास स्पष्ट रूप से परिणाम दे रहे हैं।

कर्मयोगी अभियान और जनजातीय विकास पर बोलते हुए श्री शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी बहुल गांवों को कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत चिन्हित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि लगभग ढाई लाख की आबादी वाले दुर्गम इलाकों में सड़क, अस्पताल, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। पीएम जनमन योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तंज कसते हुए कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। न्यायालय हो या चुनाव आयोग, सभी संस्थाएं अपने दायित्वों के तहत कार्य करती हैं और ऐसे मामलों को पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में देखना चाहिए।

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